रायगढ़ । जिले के संघर्षशील जुझारू नेता के रूप विख्यात जननेता रामकुमार अग्रवाल के परिवार से ताल्लुक रखने वाले कांग्रेसी नेता डॉक्टर राजू अग्रवाल ने अचानक पार्टी से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया है। डॉक्टर राजू अग्रवाल के इस कदम को लेकर शहर में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
दरअसल पार्टी में तत्कालीन समय खरसिया में उमेश पटेल के द्वारा आयोजित कांग्रेस के कार्यक्रम में विधिवत प्रवेश कराने वाले दिग्गज नेताओं दिग्विजय सिंह, चरणदास महंत और टीएस सिंहदेव ने इन्हे विधिवत कांग्रेस प्रवेश कराया था। यह सर्वविदित है कि कांग्रेस में अगर कोई दिग्गज और साफ सुथरी छवि वाला कोई व्यक्तित्व हो सकता है तो है डॉक्टर राजू अग्रवाल का नाम सबके जेहन में तत्काल करंट की तरह प्रवाहित होता है।
भले ही शहर में कई बड़े कांग्रेसी नेता हैं लेकिन डॉक्टर राजू अग्रवाल की वो छवि है जिसे कहावत के तौर पर कहते हैं जहां से वो खड़े हो जाए लाइन वहीं से लगती है ऐसा ही कुछ डॉक्टर राजू अग्रवाल में है। सबसे पहले उनकी छवि को पूर्व विधायक प्रकाश नायक ने उनके खिलाफ झूठी शिकायत कर उनकी छवि को धूमिल किया और स्वयं प्रकाश नायक 65 हजार वोटों से 2023 के विधासभा चुनाव में बुरी तरह हार गए। इतना ही नहीं कांग्रेस प्रवेश कराने वाले दिग्गज नेताओं ने भी तवज्जो नहीं दिया सिर्फ भविष्य में उनका किस तरह उपयोग किया जाना चाहिए उपयोग किया और छोड़ दिया।
संगठन और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं जैसे चरण दास महंत हो या टी एस सिंहदेव ने भी काम निकल जाने के बाद उनका दामन छोड़ सा दिया और लगातार पार्टी और संगठन में उनकी हमेशा से उपेक्षा होती रही है।
चर्चाओं की माने पार्टी और संगठन ने दिग्गज चर्चित चेहरा कांग्रेस के लिए समर्पित नेताओं की हमेशा से ही कांग्रेस में उपेक्षा का आरोप लगता रहा है। डॉक्टर राजू अग्रवाल भी उनमें से एक हैं। आज भी विधान सभा में प्रत्याशी की चर्चा होती है तो सबसे पहले डॉक्टर राजू अग्रवाल का ही नाम लिया जाता है। सर्वमान्य समर्पित कांग्रेसी नेता ने शायद इन्ही उपेक्षाओं का दंश झेलने के बाद पार्टी से इस्तीफा देना मुनासिब समझा और हालात में परिवारिक और स्वथ्यगत कारणों का हवाला दिया गया, जैसा कि अक्सर किसी भी पार्टी का समर्पित निष्ठावान नेता उपेक्षाओं से क्षुब्ध होकर त्यागपत्र देता और उसमे व्यक्तिगत कारणों को उल्लेख करता है।
डॉक्टर राजू अग्रवाल का कांग्रेस से इस्तीफा देना कांग्रेस के लिए कहीं से शुभ संकेत नहीं है और इसके पीछे संगठन के साथ चरणदास महंत,टी एस सिंहदेव जैसे नेता भी बड़े कारण है जिन्होंने ऐसे निष्ठावान कांग्रेस के सिपाही को जोड़कर न रख सके।
बहरहाल रायगढ़ विधानसभा में कांग्रेस को पिछले 20 वर्षों से एक ही परिवार के आगे नत्मस्तक कर देना ही रायगढ़ विधानसभा में हार निगम चुनाव के हार,जनपद में हार और जिला पंचायत में हार का सामना नामचीन कांग्रेसी नेताओं की अगुवाई में हुई है। जिनके खिलाफ त्वरित निर्णय नहीं होना कांग्रेस को भविष्य में भी 65 हजार की हार का सामना करना पड़ सकता है।
कांग्रेस के विश्वसनीय चेहरों को निरंतर हताश करने वालों में इस बात की खुशी पसर गई होगी कि एक और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हट गया अब कांग्रेस पर उनका और मजबूत कब्जा हो गया।
अब ये देखना होगा की रायगढ़ में डॉक्टर राजू अग्रवाल जैसी छवि वाला कोई नेता उभर पाता है या नहीं, या फिर कांग्रेस में 65 हजार की हार वाली दुर्गति होते रहेगी।
इस संबंध में जब वर्तमान जिला कांग्रेस अध्यक्ष अनिल शुक्ला से चर्चा किया तो उन्होंने कहा की उन्हे मानने की बहुत कोशिश की गई लेकिन उन्होंने स्वथयगत और व्यक्तिगत कारण बताकर पार्टी में बने रहने से इंकार कर दिया है। उनके इस्तीफे को प्रदेश कांग्रेस संगठन को भेजा जाएगा।

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