रायगढ़। महाजेंको कोल ब्लॉक प्रभावित गांव के प्रतिनिधि मंडल फर्जी ग्राम सभा दस्तावेज के मामले में एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर कलेक्टर से मुलाकात करने पहुंचे थे। कलेक्टर से मुलाकात के बाद मीडिया से रु बरु होते हुए प्रतिनिधि मंडल ने मीडिया के समक्ष बेबाक तरीके से अपनी बात कही। और बताया की किस तरह से ग्रामीणों को रास्ते में रोका गया डराया धमकाया गया और चालान काटने की भी धमकी दी गई इससे बड़ी संख्या में आने वाले ग्रामीणों को वापस भेज दिया गया।

ग्रामीण जंगल कटाई के फर्जी अनापत्ति ग्राम सभा प्रस्ताव के खिलाफ लगातार आवाज उठा रहे हैं यह फर्जी ग्राम सभा की अध्यक्षता करने वाला रविशंकर राठिया नाम के अज्ञात काल्पनिक व्यक्ति को सामने रखकर आदिवासियों को मिले अनुसूची 5 के तहत ग्रामसभा के पावर का गलत तरीके से कूट रचना कर बनाई गई है। यह एक गभीर अपराध की श्रेणी में आता है। ग्रामीण इस बात को लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं लेकिन ग्रामीणों की मांग को अनसुना अनदेखा किया जा रहा है।

प्रभावित ग्रामीणों के प्रतिनिधियों के साथ जिला मुख्यालय में सामाजिक कार्यकर्ता राधेश्याम शर्मा, राजेश त्रिपाठी, जयंत बोहीदार, और इस तरह की लड़ाई में राजनीति से इतर ऐसे प्रभावितों के मुद्दों में हमेशा मुखर रहने वाले कांग्रेसी नेता अनिल चीकू भी मौजूद रहे। इन सभी ने सरपंच संघ के प्रतिनिधियों और ग्रामीणों का जिला मुख्यालय में उनकी बात को रखने में पूरी तरह से सहयोग किया और आगे भी कानूनी मदद का आश्वस्त किया है। इन सभी लोगों के द्वारा प्रभावित क्षेत्र के सरपंचों और ग्रामीणों के साथ कलेक्ट्रेट में मजबूती के साथ अपनी अपनी बात रखते हुए फर्जी ग्राम सभा दस्तावेज जमा कराने वाले अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करते हुए कार्रवाई की गई। उल्टा उन्हे अपनी बात कहने जिला मुख्यालय आने से रोकने तक का प्रयास किया गया। इन सबके बावजूद अलग अलग रास्ते से लगभग सौ से अधिक ग्रामीण पहुंचने से सफल हुए।

प्रतिनिधि मंडल ने बताया की कलेक्टर के समक्ष पूरी बात रखी और कार्रवाई की मांग रखा इस पर कलेक्टर ने कहा कि वे शासन स्तर से प्राप्त आदेशों का पालन कर रहे हैं। आप अपनी बात रख सकते हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एफआईआर दर्ज न होने की स्थिति में न्यायालय जाने की बात कही। जिस तरह से क्षेत्र की एक आदिवासी समाज जिस तरह से प्रताड़ित हो रहा है न्याय की आस में दर दर की ठोकर खा रहा है। इस तरह से रायगढ़ एक दूसरा हसदेव बनता जा रहा है। इधर शासन द्वारा आदिवासियों को प्रदत्त उनकी रक्षा का कानून पेसा कानून कोई काम नहीं आ रहा है। काम तो सिर्फ जिसकी लाठी उसकी भैंस वाली कहावत की तर्ज पर हो रहा है।

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