रायगढ़/सारंगढ़।
सेवा सहकारी समिति मर्यादित में पदस्थ कुछ प्रबंधकों पर किसानों के नाम पर फर्जी किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण स्वीकृत कर करोड़ों रुपये के गबन के गंभीर आरोप सामने आए हैं। यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित न होकर संगठित आर्थिक अपराध और विश्वासघात की श्रेणी में आता बताया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार रायगढ़, सारंगढ़-बरमकेला, लैलूंगा और खरसिया क्षेत्र की कई सेवा सहकारी समितियों में किसानों के नाम पर ऋण दर्शाया गया, जबकि संबंधित किसानों को न तो ऋण की जानकारी थी और न ही उन्होंने कोई आवेदन किया था। इसके बावजूद समिति और बैंक रिकॉर्ड में उनके नाम पर ऋण वितरण दर्ज किया गया, जिससे सहकारी तंत्र, बैंकिंग व्यवस्था और सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।
सेवा सहकारी समिति सरकार और किसानों के बीच की एक महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाती है। अधिकांश मंडियों में किसान इन्हीं समितियों पर निर्भर रहते हैं, जिससे कई बार वे प्रबंधकों की मनमानी का विरोध नहीं कर पाते। जानकारों का कहना है कि इसी मजबूरी का फायदा उठाकर कुछ प्रबंधक लंबे समय से कथित तौर पर अनियमितताएँ करते आ रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार यह मामला छत्तीसगढ़ सहकारी सोसायटी अधिनियम, 1960 तथा प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियाँ सेवा नियम, 2018 के तहत गंभीर कदाचार की श्रेणी में आता है। नियमों के मुताबिक ऐसे मामलों में केवल निलंबन नहीं, बल्कि सीधी सेवा समाप्ति का प्रावधान है। साथ ही यह प्रकरण भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक विश्वासघात एवं फर्जी दस्तावेजों के उपयोग जैसी धाराओं में भी आता है, जिनमें एफआईआर दर्ज करना आवश्यक बताया गया है।
कानूनी जानकारों का कहना है कि करोड़ों रुपये के कथित गबन के मामलों में सिर्फ विभागीय जांच पर्याप्त नहीं होती। आर्थिक अपराध शाखा (EOW) या पुलिस द्वारा आपराधिक जांच, विशेष ऑडिट, राशि की वसूली और दोषी पाए जाने पर संपत्ति कुर्की जैसी कार्रवाई भी आवश्यक है।
धान खरीदी और किसान ऋण जैसी संवेदनशील योजनाओं में इस तरह की अनियमितताएँ सीधे तौर पर किसानों के अधिकारों और सरकारी व्यवस्था की साख को नुकसान पहुंचाती हैं। जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो इससे पूरे सहकारी तंत्र पर अविश्वास की स्थिति बन सकती है। कुछ प्रबंधकों द्वारा सीमित सेवा अवधि में करोड़ों की संपत्ति अर्जित करने का मामला भी जांच का विषय बताया जा रहा है।
प्रकरण को लेकर जनहित में यह मांग उठ रही है कि संबंधित प्रबंधकों के विरुद्ध तत्काल सेवा समाप्ति, आपराधिक प्रकरण दर्ज कर स्वतंत्र जांच कराई जाए, ताकि भविष्य में सहकारी समितियों में इस प्रकार की अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लग सके।

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