Sunday, January 11, 2026
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कोयला मजदूर सभा “HMS” का एसईसीएल प्रबंधन के खिलाफ सीधी टक्कर का ऐलान …..22 अगस्त से मांगे नहीं मानी तो खदानों का काम होगा ठप्प…सालों से लंबित मांगों को लेकर भूविस्थापितों के साथ धोखा ….प्रबन्धन के खिलाफ गंभीर आरोप …

 

 

 

एसईसीएल रायगढ़ में मजदूरों का महा-आंदोलन: 52 सूत्रीय मांगें नहीं मानीं तो 22 अगस्त से खदानें ठप*

 

 

घरघोड़ा। कोयला मजदूर सभा (HMS) रायगढ़ क्षेत्र ने प्रबंधन के खिलाफ सीधी टक्कर का ऐलान कर दिया है। औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 की धारा 22K के तहत संघ ने 52 सूत्रीय मांग पत्र सौंपते हुए साफ कहा है कि अगर अब भी प्रबंधन ने मजदूरों की आवाज नहीं सुनी, तो 22 अगस्त 2025 से रायगढ़ क्षेत्र की सभी खदानों में उत्पादन और परिवहन पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा और चक्काजाम होगा।


सालों से लंबित मुद्दे, मजदूरों में गुस्सा

संघ के महामंत्री ने बताया कि ये मांगे केवल कागज पर लिखी बातें नहीं हैं, बल्कि हर मजदूर, भूविस्थापित, ठेका कर्मी और उनके परिवार की जिंदगी से जुड़ी हैं।
मांग पत्र में खदानों की सुरक्षा व्यवस्था, भ्रष्टाचार, रोजगार, महिला सशक्तिकरण, सड़क और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी, और ठेका मजदूरों के शोषण जैसे मुद्दों पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

मुख्य आरोप और समस्याएं

सुरक्षा मानकों की अनदेखी – बिना फिटनेस और प्रमाणपत्र के वाहन खदानों में दौड़ रहे हैं, विस्फोटक सामग्री (नोनेल और बूस्टर) का खतरनाक तरीके से परिवहन किया जा रहा है, कई खदानों में न तो फेंसिंग है, न ही बेंच या बैरियर, जिससे किसी भी समय बड़ी दुर्घटना हो सकती है।

भ्रष्टाचार और पदोन्नति में धांधली – प्रबंधन पर पदोन्नति में मनमानी, पक्षपात और गलत तरीके से प्रमोशन देने के आरोप, आवास आवंटन में गड़बड़ी, समिति की सहमति के बिना घर बांटना।

भूविस्थापितों के साथ धोखा – मुआवजा और नौकरी में लापरवाही, पुनर्वास योजना में ग्रामीणों के साथ छल।
ठेका मजदूरों का शोषण – सुरक्षा उपकरण न देना, एचपीसी नियमों के तहत वेतन न देना, बिना आईएमई/वीटीसी/आईडी कार्ड के काम कराना, और महिलाओं के रोजगार में भारी कमी।

स्थानीय जनता की समस्याएं – खस्ताहाल सड़कें (ऐडू पुल से घरघोड़ा चौक और धूल चौक से लाला माता चौक तक), कई क्षेत्रों में बसों में ड्राइवरों की कमी, खदानों में रेस्ट सेल्टर और शौचालय न होना, पेयजल व एंबुलेंस की कमी से बीमार मजदूरों की मौत तक हो जाना।
महिला सशक्तिकरण की अनदेखी – पढ़ी-लिखी महिलाओं को ऑफिस, डीजल फिलिंग और सबस्टेशन अटेंडर जैसे पदों पर मौका न देना।

सीएसआर में लापरवाही – प्रभावित गांवों में विकास कार्यों की अनदेखी, वादों के बावजूद कोई ठोस काम नहीं।

आंदोलन के निर्धारित धरना कार्यक्रम

6 अगस्त: बरौद खदान परिसर में धरना

8 अगस्त: जामपाली खदान परिसर में धरना

11 अगस्त: बिजारी खदान परिसर में धरना

13 अगस्त: छाल खदान परिसर में धरना

19–21 अगस्त: रायगढ़ क्षेत्रीय मुख्यालय में क्रमिक भूख हड़ताल

22 अगस्त से: सभी खदानों में उत्पादन और परिवहन ठप, चक्काजाम

संघ ने दी ये चेतावनी

संघ के महामंत्री ने कहा –“हमारी 52 मांगें हर मजदूर के खून-पसीने और सालों की मेहनत की कीमत हैं। प्रबंधन अगर इसे नजरअंदाज करेगा, तो रायगढ़ की धरती से एक भी कोयले की गाड़ी नहीं निकलेगी। आंदोलन में किसी भी गतिरोध या नुकसान की पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।”

बताया जाता है कि एसईसीएल रायगढ़ क्षेत्र के मजदूरों में गुस्सा चरम पर है। आंदोलन की चेतावनी के बाद खदान क्षेत्रों और आसपास के गांवों में चर्चा तेज हो गई है। मजदूर संगठन का कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ मजदूरों की नहीं, बल्कि हर उस परिवार की है जो इस धरती पर अपनी मेहनत की कमाई से जीवन चला रहा है।

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